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Sunday, May 3, 2015
स्मार्टफोन को 2 मिनट में चार्ज करने वाला चार्जर का ईजाद

स्मार्टफोन को 2 मिनट में चार्ज करने वाला चार्जर का ईजाद

इजरायल की एक नई कंपनी, स्टोरडॉट ने अत्यंत तीव्र गति वाला मोबाइल फोन चार्जर विकसित किया है, जो स्मार्टफोन की बैटरियों को मात्र दो मिनट में चार्ज कर सकता है।
हाल में लास वेगास में आयोजित 'कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो' में प्रदर्शित की गई बैटरियां थोड़ी कम अवधि तक चलती हैं, लेकिन इसकी खूबी यह है कि केवल दो मिनट चार्ज करने के बाद लगभग पांच घंटे तक चलती हैं।

कंपनी ने एक बयान में कहा, लेकिन बैटरी चूंकि दो मिनट में चार्ज हो जाती है, लिहाजा दिन में दो बार चार्ज कर लेने में कोई कठिनाई नहीं होगी। कंपनी ने एक प्रस्तुति के दौरान यह भी दिखाया कि तेल अवीव में प्रयोगशाला में विकसित की जा रही जैव कॉबर्निक चार्जर प्रणाली किसी स्मार्टफोन की बैटरी को मात्र 30 सेकेंड में ही चार्ज कर सकती है।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डोरोन मायर्सडोर्फ ने कहा है, यह चार्जर, बैटरी प्रद्योगिकी को नए सिरे से विकसित करके तैयार किया गया है। इस बैटरी में होने वाली अभिक्रियाएं सामान्य बैटरी में होनी वाली अभिक्रियाओं से पूरी तरह भिन्न होती हैं, और इसमें खासतौर से तैयार किए गए कृत्रिम कॉर्बनिक अणु शामिल होते हैं।
अब कंप्यूटर में वेब ब्राउजर पर भी चलेगा व्हाट्सएप्प

अब कंप्यूटर में वेब ब्राउजर पर भी चलेगा व्हाट्सएप्प

लोकप्रिय मैसेजिंग एप्प व्हाट्सएप्प ने अपना वेब ब्राउजर संस्करण आज पेश किया। यानी अब यह एप्प पर्सनल कंप्यूटर आदि पर भी चलेगा। व्हाट्सएप्प ने एक ब्लॉग में लिखा है, ‘आज, पहली बार आप लाखों लोग अपने वेब ब्राउजर पर व्हाट्सएप्प चला सकेंगे।’

उल्लेखनीय है कि दुनिया भर में 60 करोड़ से अधिक लोग व्हाट्सएप्प का इस्तेमाल करते हैं। अब तक यह एंड्रायड, आईओएस, विंडोज व ब्लैकबेरी जैसे आपरेटिंग सिस्टम वाले स्मार्टफोन पर ही काम करता है। इसके लिए ‘वेब डाट व्हाट्सएप्प डाट काम’ का इस्तेमाल करना होगा। इसके लिए फोन के भी इंटरनेट से जुड़ा रहना जरूरी है।
फेसबुक की तरह संपर्क साधती हैं मस्तिष्‍क की तंत्रिका कोशिकाएं

फेसबुक की तरह संपर्क साधती हैं मस्तिष्‍क की तंत्रिका कोशिकाएं

मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाएं आपस में सोशल नेटवर्क की तरह गुथी हुई हैं। एक शोध निष्कर्ष में इसका खुलासा किया गया है।

यूनिवर्सिटी ऑफ बसेल के शोधकर्ताओं का कहना है कि हर एक तंत्रिका कोशिका का संपर्क दूसरी तंत्रिका कोशिकाओं के साथ होता है, लेकिन कुछ तंत्रिका कोशिकाओं का आपस में घनिष्ठ संबंध होता है, जैसे फेसबुक पर लोगों का अपने दोस्तों के साथ होता है। विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थॉमस मर्सिक-फ्लोगेल ने बताया कि मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं में भी एक तरह की प्रकृति वाली तंत्रिका कोशिकाओं के बीच घनिष्ठ और मजबूत संपर्क होता है, जबकि विपरीत या अलग प्रकृति वाली तंत्रिका कोशिकाओं के साथ कम या लगभग नहीं के बराबर संपर्क होता है।

शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के दौरान मस्तिष्क के सेरेबरल कॉटेक्स का विशेष रूप से अध्ययन किया, जहां आंखों द्वारा सूचना प्रेषित होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह वैसा ही है, जैसा कि फेसबुक पर किसी इंसान के कई सारे दोस्त होते हैं, लेकिन किसी खास समूह के साथ ही उनका संपर्क मजबूत होता है।
गूगल ने रंगबिरंगा डूडल जारी कर मनाया होली का जश्‍न

गूगल ने रंगबिरंगा डूडल जारी कर मनाया होली का जश्‍न

 पूरे देश में होली की धूम है। लोग होली की मस्ती में झूम रहे हैं, ऐसे में भला गूगल कैसे पीछे रह सकता है। गूगल ने शुक्रवार को होली के त्यौहार पर रंगरंगीला डूडल जारी किया। गूगल के होम पेज पर शुक्रवार को होली के अवसर पर खास एनिमेशन दिखा।

इसमें गूगल के नाम पर विभिन्न प्रकार के रंग की फुहारें छोड़ते हुए दिखाया गया है। गूगल के इस डूडल में हरे, लाल, पीले, नारंगी और नीले रंगों के बीच सफेद रंग से गूगल लिखा हुआ नजर आ रहा है। यह सभी रंग फुहार के रूप में छूटते हुए दिख रहे हैं। गूगल के इस डूडल पर क्लिक करते ही होली से जुड़े पेज, और उससे संबंधित जानकारियों वाले पेज खुल रहे हैं। यह पांचवी वार है जब गूगल ने होली पर डूडल बनाया है। इससे पहले गूगल ने साल 2014 में भी डूडल के जरिये से होली का जश्न मनाया था।
सौर विमान पर विश्व परिक्रमा का मकसद स्वच्छ उर्जा के मामले में भारत का समर्थन

सौर विमान पर विश्व परिक्रमा का मकसद स्वच्छ उर्जा के मामले में भारत का समर्थन

सौर उर्जा चालित विमान से विश्व परिक्रमा करने निकले स्विट्जरलैंड के पायलट बर्ट्रेंड पिकार्ड और आंद्रे बोर्शबर्ग चाहते हैं कि भारत के 1.2 अरब लोग वैश्विक पर्यावरण को बचाने के लिए नवीकरणीय उर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्येश्य वाले उनके अभियान का समर्थन करे।


पिछली रात मस्कट से अहमदाबाद की उड़ान में सोलर इंपल्स नामक अपने विमान को उड़ाने वाले पिकार्ड ने कहा ‘हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बिल्ले को हम पहन सकते हैं। हम अपने बाजू पर भारत का बिल्ला लगा सकते हैं।’ मनोचिकित्सक, पिकार्ड ने कहा कि सोलर इंपल्स 2 (एसआई2) परियोजना में प्रौद्योगिकी का नवोन्मेषन करने से लेकर इंजीनियरिंग और विभिन्न देशों की सरकार से अनुमति लेनी पड़ी।

सोलर इंपल्स 2 के डैनों में 17,000 से अधिक सौर सेल लगे हैं जो विमान की बैटरी को रिचार्ज करते हैं। यह करीब 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरता है। उन्होंने कहा कि विमान इसके बाद वाराणसी उड़ान भरेगा और प्रशांत महासागर पार करने से पहले 35,000 किलोमीटर की यात्रा के दौरान चीन एवं म्यांमार समेत 12 जगहों पर रूकेगा।

अबुधाबी से मस्कट हो कर सफलतापूर्वक अहमदाबाद पहुंचे पिकार्ड ने कहा कि विश्व के सामने चिकित्सा अनुसंधान, गरीबी उन्मूलन, पर्यावरण की रक्षा, बेहतर कामकाज और मानवाधिकार जैसी नयी चुनौतियां हैं और एसआई2 इन मुद्दों के बारे में जागरूकता फैलाना चाहता है। उन्होंने अपने अभियान को भारत की जनता से समर्थन मिलने की उम्मीद जताई और कहा ‘हमने अपनी वेबसाईट पर एक अभियान शुरू किया है। हमें 1.2 अरब लोगों से हस्ताक्षर मिल सकते हैं।’ बोर्शबर्ग इंजीयिनर हैं और शौकिया तौर पर सैनिक पायलट हैं। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय उर्जा के जरिए असंभव दिखने वाली चीजें की जा सकती हैं।
मंगल रोवर क्यूरॉसिटी ने रोबोटिक आर्म का इस्तेमाल फिर शुरू किया

मंगल रोवर क्यूरॉसिटी ने रोबोटिक आर्म का इस्तेमाल फिर शुरू किया

नासा के अंतरिक्ष यान मंगल रोवर क्यूरियॉसिटी ने रोबोटिक आर्म का इस्तेमाल करना फिर से आरंभ कर दिया है। पिछले महीने इलेक्ट्रिकल खराबी के कारण इस मिशन के वैज्ञानिकों को खुदाई संबंधी काम रोकना पड़ा था।


क्यूरॉसिटी ने बीते सप्ताह चट्टान के पाउडर को छानने और उसे संबंधित उपकरण के पास भेजने के लिए अपनी रोबोटिक आर्म का इस्तेमाल किया।

नासा ने कहा कि पिछले महीने शार्ट सर्किट के बाद मंगल ग्रह पर खुदाई के काम को रोक दिया गया था हालांकि इससे पहले नमूने एकत्र कर लिए गए थे। रोवर के भीतर मौजूद ‘केमिस्ट्री एंड मिनरलॉजी’ (केमिन) उपकरण ने चट्टान के पाउडर का नमूना हासिल किया है।
आईआरएनएसएस-1डी का श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण कल

आईआरएनएसएस-1डी का श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण कल

भारत का दिशासूचक उपग्रह आईआरएनएसएस-1डी शनिवार को श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-सी27 के जरिए प्रक्षेपण के लिए पूरी तरह से तैयार है। यह अमेरिका के जीपीएस की तर्ज पर भारत के लिए अपनी दिशासूचक प्रणाली का मार्ग प्रशस्त करेगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने आज कहा कि यह प्रक्षेपण कल यहां से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से कल शाम पांच बजकर 19 मिनट पर होना है और इसकी 59.5 घंटे की उल्टी गिनती निर्बाध रूप से चल रही है।

इसरो के सूत्रों ने कहा कि कल सुबह पांच बजकर 49 मिनट पर शुरू हुई उल्टी गिनती निर्बाध रूप से आगे बढ़ रही है। चौथे चरण में नाइट्रोजन ऑक्सीडाइजर के मिश्रित ऑक्साइड भरने का काम पूरा हो चुका है।’’ पहले यह प्रक्षेपण नौ मार्च को होना था लेकिन टेलीमीट्री ट्रांसमीटर में एक खामी पाए जाने पर इसे स्थगित कर दिया गया था। आईआरएनएसएस-1डी, इसरो द्वारा भारतीय क्षेत्रीय दिशा सूचक उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) में स्थापित किए जाने वाले नियोजित सात उपग्रहों की श्रृंखला में चौथा उपग्रह है।
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