Breaking News
Loading...

Feature (Middle)

  • New Movies
  • Recent Games
  • Tech Review

Tab 1 Top Area

Tech News

Game Reviews

Recent Post

Showing posts with label देशमे क्या हुवा. Show all posts
Showing posts with label देशमे क्या हुवा. Show all posts
Saturday, May 2, 2015
वायुमंडल में कार्बन डाय-ऑक्साइड के प्रदूषण से जल्द मिलेगी मुक्ति!

वायुमंडल में कार्बन डाय-ऑक्साइड के प्रदूषण से जल्द मिलेगी मुक्ति!

एक ऐसे समय में जब दुनियाभर के नेता वैश्विक तापमान में इजाफा, ऊर्जा संकट और घटते संसाधन से निबटने के लिए चर्चा कर रहे हैं, आईआईटी दिल्ली के छात्रों के एक समूह ने पारिस्थितिकी के तीनों मुद्दों का एकल समाधान निकालने का प्रयास किया है।

आईआईटी दिल्ली के छात्रों की इस परियोजना में एक समस्या के कारण को अन्य दो के हल की कुंजी में बदला जाता है। इसे शनिवार को यहां इंस्टीट्यूट में आयोजित 11वें आईआईटी ओपन हाउस में प्रदर्शित किया जाएगा। वायुमंडल में कार्बन डायक्साइड के स्तर में इजाफा वैश्विक तापमान में इजाफे का एक प्रमुख कारण है। इसने इस गैस के उत्पादन में कमी लाने और इस पर नियंत्रण स्थापित करने की जरूरत बढ़ा दी है।

आईआईटी दिल्ली के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर अनिल वर्मा के नेतृत्व में एक अनुसंधान समूह ने हवा में प्रदूषणकारी गैस की ना सिर्फ मात्रा कम करने, बल्कि उसे अनेक मूल्यवान उत्पादों में बदलने की भी कोशिश की है। वर्मा कहते हैं, ‘हम कार्बन डायक्साइड के विद्युत-रासायनिक रूपांतरण में लगे हैं और पाया है कि कार्बन डायक्साइड का उपयोग मीथेन और अन्य मूल्यवान उत्पादों के उत्पादन में किया जा सकता है।’

मीथेन में कार्बन डायक्साइड का रूपांतरण सौर या पवन ऊर्जा जैसे अक्षय ऊर्जा का उपयोग कर किया जा रहा है। वर्मा बताते हैं कि पारंपरिक रूप से रूपांतरण के दौरान गैस किसी घोलक में घोली जाती है। उनकी टीम ने दूसरा रास्ता अपनाया है। उन्होंने सीधे संयंत्र में गैस का उपयोग किया है जहां उसे मीथेन और फार्मिक अम्ल जैसे कुछ अन्य उत्पादों में बदला जाता है।’
जलवायु परिवर्तन पर भारत से कोई मतभिन्नता नहीं: अमेरिका

जलवायु परिवर्तन पर भारत से कोई मतभिन्नता नहीं: अमेरिका

अमेरिका ने सोमवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत के साथ कोई मतभिन्नता नहीं है और वह भारत का सर्वश्रेष्ठ साझेदार होना चाहेगा। कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ किया था कि देश इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव में नहीं आएगा।


पेरिस में इस साल के आखिर में संयुक्त राष्ट्र की जलवायु वार्ता से पहले अमेरिका ने कहा कि भारतीय उद्योगों के लिए जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में नेतृत्व करने के अवसर हैं क्योंकि यहां किये जाने वाले अभिनव प्रयोग वैश्विक समुदाय के लिए आकर्षक होंगे। ये अधिक बेहतर, स्वच्छ, सार्थक और लाभदायक होंगे।

भारत में अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा ने कहा, ‘चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्मार्ट सिटीज, मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान जैसे कार्यक्रमों को लागू करना चाहते हैं और 175 गीगावाट स्वच्छ, अक्षय ऊर्जा 2022 तक हासिल करने के लक्ष्य पर काम करना चाहते हैं, इसलिए स्वच्छ प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करने के अनगिनत अवसर होंगे।’ वह जलवायु संबंधी कार्रवाइयों से जुड़े आर्थिक अवसरों को रेखांकित करने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम ‘क्लाइमेट पार्टनर्स’ की शुरूआत करते हुए अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।

ग्रीनहाउस गैस ‘हाइड्रोफ्लोरोकार्बन’ को चरणबद्ध तरीके से कम करने के भारत के हालिया प्रस्ताव का स्वागत करते हुए अमेरिका ने कहा कि वह भारत का ‘सर्वश्रेष्ठ साझेदार’ होने का इच्छुक है और कम कार्बन उत्सर्जन और स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य की ओर अंतरण को बढ़ावा देने के तरीकों पर मिलकर काम कर रहा है। वर्मा ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में किस तरह का नेतृत्व देना चाहता है, अमेरिका उसे समझता है। उन्होंने कहा, ‘हमें 1990 के दशक की शुरुआत की दुनिया से आगे निकलने की जरूरत है जो दो खेमों में बंटी हुई थी। अब हम दो खेमों में नहीं बंटे हैं। ’ वर्मा ने कहा कि भारत की ओर न केवल अमेरिका बल्कि दुनिया देख रही है और उसे जलवायु परिवर्तन पर अहम भूमिका निभानी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि भारत को जलवायु परिवर्तन पर विकसित देशों द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और इसके बजाय जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में भारत को दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए। वर्मा ने कहा कि अमेरिका ने साल 2025 तक उत्सर्जन 28 प्रतिशत तक कम करने की प्रतिबद्धता के साथ ‘इंटेंडेड नेशनली डिटरमाइन्ड कंट्रीब्यूशन’ (आईएनडीसी) पहले ही दे दिया है।
अब पूरे देश में पेट्रोलियम मंत्रालय ने लॉन्‍च की एलपीजी कनेक्शन पोर्टेबिलिटी

अब पूरे देश में पेट्रोलियम मंत्रालय ने लॉन्‍च की एलपीजी कनेक्शन पोर्टेबिलिटी

अब देश भर के रसोई गैस उपभोक्ता यदि चाहें तो मर्जी से अपना रसोई गैस का डीलर और कंपनी बदल सकते हैं. यह ऐलान पेट्रोलियम मंत्रालय ने बुधवार को किया.
पिछले साल अक्टूबर में एलपीजी कनेक्शन पोर्टेबिलिटी की स्कीम को देश के 13 राज्यों के 24 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पर लागू किया गया था. अब इसे पूरे देश के 480 जिलों के 8 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों के लिए लागू करने का ऐलान किया गया है. इस स्कीम का फायदा उठाने के लिए ग्राहकों को अपनी तेल कंपनी के वेबसाइट पर रजिस्टर कर अप्लाई करना होगा. ऐसा करने के बाद ग्राहक को कंपनी से पोर्टेबिलिटी की गुजारिश माने जाने की कन्फर्मेशन ई मेल आएगी.

अगर ग्राहक अपनी कंपनी के भीतर ही डीलर बदलना चाहता है तो ग्राहक को अपनी इच्छा के डीलर के पास ये मेल लेकर जाना होगा. अगर ग्राहक कंपनी के बाहर यानी किसी दूसरी सरकारी तेल कंपनी के डीलर के पास अपना कनेक्शन ट्रांसफर करना चाहता है, तो ग्राहक को अपने वर्तमान डीलर के पास अपने सिलेंडर और रेगुलेटर जमा करके ट्रांसफर डॉक्यूमेंट लेकर अपनी पसंद के डीलर के पास जाना होगा. पिछले डीलर से मिला सिक्योरिटी डिपोजिट देकर सिलेंडर और रेग्युलेटर लेना होगा.

कंपनी बदलने पर भी ग्राहक को नई कंपनी से कनेक्शन के लिए अपना पहले वाला ही सिक्योरिटी डिपोजिट देना होगा. यानी ग्राहक पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा. ट्रांसफर की ये सुविधा ग्राहकों के लिए मुफ्त है.
Copyright © 2012 HEALTH INFORMATION All Right Reserved
Designed by CBTblogger