जलवायु परिवर्तन पर भारत से कोई मतभिन्नता नहीं: अमेरिका
अमेरिका ने सोमवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत के साथ कोई मतभिन्नता नहीं है और वह भारत का सर्वश्रेष्ठ साझेदार होना चाहेगा। कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ किया था कि देश इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव में नहीं आएगा।
पेरिस में इस साल के आखिर में संयुक्त राष्ट्र की जलवायु वार्ता से पहले अमेरिका ने कहा कि भारतीय उद्योगों के लिए जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में नेतृत्व करने के अवसर हैं क्योंकि यहां किये जाने वाले अभिनव प्रयोग वैश्विक समुदाय के लिए आकर्षक होंगे। ये अधिक बेहतर, स्वच्छ, सार्थक और लाभदायक होंगे।
भारत में अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा ने कहा, ‘चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्मार्ट सिटीज, मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान जैसे कार्यक्रमों को लागू करना चाहते हैं और 175 गीगावाट स्वच्छ, अक्षय ऊर्जा 2022 तक हासिल करने के लक्ष्य पर काम करना चाहते हैं, इसलिए स्वच्छ प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करने के अनगिनत अवसर होंगे।’ वह जलवायु संबंधी कार्रवाइयों से जुड़े आर्थिक अवसरों को रेखांकित करने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम ‘क्लाइमेट पार्टनर्स’ की शुरूआत करते हुए अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
ग्रीनहाउस गैस ‘हाइड्रोफ्लोरोकार्बन’ को चरणबद्ध तरीके से कम करने के भारत के हालिया प्रस्ताव का स्वागत करते हुए अमेरिका ने कहा कि वह भारत का ‘सर्वश्रेष्ठ साझेदार’ होने का इच्छुक है और कम कार्बन उत्सर्जन और स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य की ओर अंतरण को बढ़ावा देने के तरीकों पर मिलकर काम कर रहा है। वर्मा ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में किस तरह का नेतृत्व देना चाहता है, अमेरिका उसे समझता है। उन्होंने कहा, ‘हमें 1990 के दशक की शुरुआत की दुनिया से आगे निकलने की जरूरत है जो दो खेमों में बंटी हुई थी। अब हम दो खेमों में नहीं बंटे हैं। ’ वर्मा ने कहा कि भारत की ओर न केवल अमेरिका बल्कि दुनिया देख रही है और उसे जलवायु परिवर्तन पर अहम भूमिका निभानी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि भारत को जलवायु परिवर्तन पर विकसित देशों द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और इसके बजाय जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में भारत को दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए। वर्मा ने कहा कि अमेरिका ने साल 2025 तक उत्सर्जन 28 प्रतिशत तक कम करने की प्रतिबद्धता के साथ ‘इंटेंडेड नेशनली डिटरमाइन्ड कंट्रीब्यूशन’ (आईएनडीसी) पहले ही दे दिया है।
पेरिस में इस साल के आखिर में संयुक्त राष्ट्र की जलवायु वार्ता से पहले अमेरिका ने कहा कि भारतीय उद्योगों के लिए जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में नेतृत्व करने के अवसर हैं क्योंकि यहां किये जाने वाले अभिनव प्रयोग वैश्विक समुदाय के लिए आकर्षक होंगे। ये अधिक बेहतर, स्वच्छ, सार्थक और लाभदायक होंगे।
भारत में अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा ने कहा, ‘चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्मार्ट सिटीज, मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान जैसे कार्यक्रमों को लागू करना चाहते हैं और 175 गीगावाट स्वच्छ, अक्षय ऊर्जा 2022 तक हासिल करने के लक्ष्य पर काम करना चाहते हैं, इसलिए स्वच्छ प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करने के अनगिनत अवसर होंगे।’ वह जलवायु संबंधी कार्रवाइयों से जुड़े आर्थिक अवसरों को रेखांकित करने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम ‘क्लाइमेट पार्टनर्स’ की शुरूआत करते हुए अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
ग्रीनहाउस गैस ‘हाइड्रोफ्लोरोकार्बन’ को चरणबद्ध तरीके से कम करने के भारत के हालिया प्रस्ताव का स्वागत करते हुए अमेरिका ने कहा कि वह भारत का ‘सर्वश्रेष्ठ साझेदार’ होने का इच्छुक है और कम कार्बन उत्सर्जन और स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य की ओर अंतरण को बढ़ावा देने के तरीकों पर मिलकर काम कर रहा है। वर्मा ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में किस तरह का नेतृत्व देना चाहता है, अमेरिका उसे समझता है। उन्होंने कहा, ‘हमें 1990 के दशक की शुरुआत की दुनिया से आगे निकलने की जरूरत है जो दो खेमों में बंटी हुई थी। अब हम दो खेमों में नहीं बंटे हैं। ’ वर्मा ने कहा कि भारत की ओर न केवल अमेरिका बल्कि दुनिया देख रही है और उसे जलवायु परिवर्तन पर अहम भूमिका निभानी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि भारत को जलवायु परिवर्तन पर विकसित देशों द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और इसके बजाय जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में भारत को दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए। वर्मा ने कहा कि अमेरिका ने साल 2025 तक उत्सर्जन 28 प्रतिशत तक कम करने की प्रतिबद्धता के साथ ‘इंटेंडेड नेशनली डिटरमाइन्ड कंट्रीब्यूशन’ (आईएनडीसी) पहले ही दे दिया है।

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